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Monday 23 May 2011

ह्रदय में खुशियाँ लागी है !


जिंदगी कि तलाश में मौत से भी हम दो चार हुए,
तेरी खातिर तो हम दुनिया वालों के लिए बेकार हुए !

प्यास बुझाने के खातिर जहर भी को भी गले उतार गये,
सपने को सच करने कि ललक में सच्चाई को ही मार गये !

जाने क्यूँ नफरत करने वाले ही हमको संवार गये ,
फिर से कुछ लोग मुहब्बत से बन्दे को बिगाड़ गये !

क्या मिल गया उनको जो सपनो कि बगिया उजाड़ गये ,
ना शुकरों ने जिन्दा ही हमें ज़मीन में गाड़ दिये !

फिर लौटा सपनो का सौदागर नई उम्मीदे जागी है ,
उसके शीतल दिल में आग नई कोई जागी है !

चिंता अब उसके मन से कोसों दूर भागी है ,
नव जीवन का उदय हुआ ह्रदय में खुशियाँ लागी है !

2 comments:

  1. जिंदगी कि तलाश में मौत से भी हम दो चार हुए,
    तेरी खातिर तो हम दुनिया वालों के लिए बेकार हुए

    फिर लौटा सपनो का सौदागर नई उम्मीदे जागी है ,
    उसके शीतल दिल में आग नई कोई जागी है !

    bahot hi dil ko chune wali line hai or saranih hai

    bus aise likhte rahiye taki hame aise hi padne mile

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