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Wednesday, June 15, 2011

मेरे शब्दों को सम्हाल लो कविता बनकर...


चलो तुम्हे अब कोई नाम दे ही दूँ...
कब तक फिरती रहोगी अनामिका बनकर

कब तक कान तरसेंगे तेरी बोल सुनने को...
चलो अब सुना दो कुछ तुम सुनीता बनकर

कब तक सुनी रहेगी जिंदगानी इस तरह...
चलो अब कोई तान छेड़ दो संगीता बनकर

कब तक मेरी ऑंखें अंधकारमय रहेंगी...
चलो अब सूरत प्यारी दिखा दो सुनयना बनकर

कब तक प्यासी रहेगी जिह्वा मेरी...
चलो अब प्यास बुझा दो सरिता बनकर

कब तक मेरी फरियाद ठुकराई जाएगी...
चलो अब मेरी प्रार्थना सुन लो विनीता बनकर

कब तक जिंदगी के जंग में संघर्ष करता रहूँ...
चलो जीत लो मेरी जिंदगानी तुम रंजीता बनकर

कब तक मेरे अल्फाज़ लडखडाते रहेंगे...
चलो अब मेरे शब्दों को सम्हाल लो कविता बनकर

2 comments:

  1. बने कविता लिखथव मुकेश भाई, आपके छत्‍तीसगढ़ ब्‍लॉगर्स चौपाल में स्‍वागत हावय.

    छत्‍तीसगढ़ ब्‍लॉगर्स चौपाल - http://hamarchhattisgarh.blogspot.com/

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  2. अच्‍छा लगा आपके ब्‍लॉग पर आकर....आपकी रचनाएं पढकर और आपकी भवनाओं से जुडकर....

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