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Wednesday 15 June 2011

मन की बात चंद पंक्तियों में ...


ये वक़्त का तकाज़ा है या नसीब का खेल
सच्चे ईमानदार क्यूँ होते जा रहें हैं फेल
कैसी ये राजनितिक समीकरण है कैसा ये भ्रष्टाचार से मेल
क्यूँ बढ़ रहा है जुर्म अपराधियों को होती नहीं क्यूँ जेल
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कैसा ये सत्ता का मोह है,
खुद
कि मातृभूमि पर करते कुठाराघात है !
कौन सी कोंख से देश द्रोही पैदा होते,
क्या इनकी जात है !
गरीबों का खून चुसना,सच्चों का दमन करना,
इनके लिए शाबासी कि बात है !
ये देश को खोखला करने कि,
चाहत का अभी सिर्फ शुरुवात है !
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वह क्या बात है !
वह भारत के निति-निर्धारकों तुम्हारी क्या बात है
कसाब को दामाद बनाते निर्दोषियों को सूली पर चढाते
वह क्या बात है !
हवाला कि हवा चली थी तब सूटकेस पर नज़र जमी थी
बदकिस्मती देश कि भ्रष्ट लोगों के नीचे सच्चों कि बारात है
वह क्या बात है !
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सत्याग्रह को ग्रहण लग गया अत्याचारी राहूओं से !
क्या ऐसा हो नहीं सकता उखाड फेकें इन्हें सबल भुजाओं से !!

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