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Thursday 13 October 2011

छलकने दो अरमानो को..



झुकी-झुकी सी
पलकों में,
तन्हाई को क्यूँ
इतना समेटे हो
छलकने दो
उन अरमानो को
दोनो नैनों से
दर्द को इतना क्यूँ
अपने दामन में लपेटे हो


4 comments:

  1. क्या बात है सर।
    बहुत अच्छा लिखते हैं आप।

    सादर
    -----
    मेरे ब्लॉग पर आपका स्वागत है

    ReplyDelete
  2. एक निवेदन
    कृपया निम्नानुसार कमेंट बॉक्स मे से वर्ड वैरिफिकेशन को हटा लें।
    इससे आपके पाठकों को कमेन्ट देते समय असुविधा नहीं होगी।
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    अधिक जानकारी के लिए कृपया निम्न वीडियो देखें-
    http://www.youtube.com/watch?v=L0nCfXRY5dk

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  3. ..........दिल को छू लेने वाली प्रस्तुती

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