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Friday, October 28, 2011

अजीब बंदिशें....



तेरी तारीफ मैं करूँ कैसे,
अजीब बंदिशें लगा रखी है !
जिंदगी की तलाश किन राहों में करूँ,
मौत की बिसात फैला रखी है !
दम घुट जायेगा क्या इस तरहा,
जहरीली हवा जो बहा रही है !
तेरी आँखों की के इशारों को समझूँ .
या लडखडाते लबों को जो दास्ताँ कह रही है !

मुकेश "हृदयगाथा"

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