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Friday, November 11, 2011

प्यार का साथ बांकी है


बीता महज पॉँच - दस साल ही है,
यादें तो कल की लगती है !
निगाहों में ताकत रहती थी देखने की,
तो तुम्हे छुप छुपकर ताकना !
तेरे घर के राहे-चौराहे बैठ,
मूंगफल्ली और चने दिन भर फांकना !
सुबह ताजी हवा लेने तुम जाती हो,
ये जानकर तेरे मुहल्ले पहुँचकर हांफना !
किताबे तेरी चुराकर,
फूल गुलाबों के टांकना !
क्या ये मुहब्बत नहीं लगती थी,
तेरे बालकनी से तुम्हे झांकना !
समय बीत गया अहसास बांकी है,
अब तलक तेरे प्यार का साथ बांकी है !

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