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Friday 27 July 2012

"प्यार कैसे करूँ"



लोग कहते हैं मैं बेबसी पे नही लिखता,
किसी की तनहाइयों में नहीं दिखता !

तुझको कैसे बता दूँ की तुझसे प्यार है,
इसी बात पे तो तुझ संग तकरार है !

मैंने तन्हाइयों में दर्द को समेटा है,
मीलों दूर होते भी करीब से तुझको देखा है !

 मैं बेबसी का इजहार कैसे करूँ,
तुझसे इस तरहा प्यार कैसे करूँ !



मुकेश गिरि गोस्वामी : हृदयगाथा मन की बातें 

10 comments:

  1. बेबसी में प्यार नहीं हो सकता..
    भावप्रद रचना...

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    Replies
    1. रिना जी, आपको पसंद आया जिसके लिए मैं आभारी हूँ,,
      सादर धन्यवाद

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  2. बहुत सुन्दर प्रस्तुति!
    --
    इस प्रविष्टी की चर्चा कल रविवार (29-07-2012) के चर्चा मंच पर भी होगी!
    सूचनार्थ!

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    Replies
    1. शास्त्री जी, सादर अभिवादन ..
      चर्चा मंच पर चर्चा करने के लिए अग्रिम धन्यवाद...

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  3. अभिव्यक्ति की अकुलाहट ...!!
    सुंदर रचना ...धीमे धीमे संगीत सुनते हुए ....बहुत अच्छी लगी ...!!
    शुभकामनायें...

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    Replies
    1. अनुपमा जी सादर नमस्कार....
      आपके अनुपम वक्तव्य से ह्रदय आनंदित हो गया...
      धन्यवाद !!!

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  4. Replies
    1. हबीब जी, नमस्कार
      मेरा प्रयास आपको पसंद आया जिसके लिए शुक्रिया...

      आगे भी आपके वक्तव्य से प्रेरणा मिलते रहेगी, इसी आशा के साथ धन्यवाद...

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  5. बहुत सुन्दर शब्दों में अपने प्यार का इजहार बहुत अच्छी लगी पोस्ट बधाई

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    Replies
    1. राजेश कुमारी जी, नमस्कार
      बहुत-बहुत शुक्रिया... हमेशा आपके स्वागत को उत्सुक रहेंगे ब्लॉग पर आते रहिएगा.. धन्यवाद...

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