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Hindi

Saturday 29 September 2012

सितमगर बन जाओ तो हक़ है तुमको...


तुझे भूल पाना मुमकिन नहीं,
तुम भूल जाओ तो हक़ है तुमको!
जुदाई की कल्पना भी संभव नहीं मेरे लिए,
तुम छोड़ जाओ तो हक़ है तुमको!
मैंने सांसो में बसा लिया है,
मेरी सांसों को तोड़ जाओ तो हक़ है तुमको!
नैनों में बस गए हो अब तो,
निगाहें चुरा जाओ तो हक़ है तुमको!
मिलने की हसरत है तुमसे,
जुदा हो जाओ तो हक़ है तुमको!
दिल की धडकन बन गई हो,
धडकनों को तोड़ जाओ तो हक़ है तुमको!
मिलता सुकून तुमसे है,
तडपता छोड़ जाओ तो हक़ है तुमको!
मैंने तो मुहब्बत की है,
सितमगर बन जाओ तो हक़ है तुमको!

मुकेश गिरि गोस्वामी : हृदयगाथा : मन की बातें

Wednesday 26 September 2012

लिखकर नाम मेरा मिटाकर तो देखिये ...




अपनी नज़रों से मेरी नज़रें मिलाकर तो देखिये 
कभी दिल ही दिल गुनगुनाकर तो देखिये  
मंजिल मिल जाएगी 
कभी कदम से कदम मिलाकर तो देखिये
हम तो बसे हैं सिर्फ तेरी सांसों में
दिल से कभी तलाश कर के तो देखिये 
हम बिक जायेंगे तेरी इक मुस्कराहट पे
 कभी आजमा कर तो देखिये 
दुनिया में न मिलेगा कोई हम सा आशिक,
कभी दिल से दिल मिलाकर तो देखिये
हमारी यादें कभी मिट न सकेंगी दिल से तुम्हारी
कोशिश लिखकर नाम मेरा मिटाकर तो देखिये  

"मुकेश गिरि गोस्वामी हृदयगाथा : मन की बातें"

Saturday 15 September 2012

कुछ बात तो है "तुम" में..


कुछ बात तो है "तुम" में
कि ये "नज़र" तुमसे हटती नहीं
सच्ची "दोस्ती" में लाख "तकलीफें" हो
दोस्ती घटती नहीं
मैं "घायल" हो जाऊं
ऐसा कोई "तीर" ही नहीं
नज़रों से कोई घायल करदे
ऐसी "मेरी" तकदीर नहीं

मुकेश गिरि गोस्वामी "हृदयगाथा" : मन की बातें