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Wednesday, November 7, 2012

हसरतें...


तेरी प्रीत बसी दिल में उसे छुपायें कैसे,
अपनी हसरतों को जुबान पे लायें कैसे
दूर है वो, प्यार अपना उससे बढायें कैसे,
मजबूर हूँ मैं इस कदर, अपनापन जतायें कैसे
है वो अमानत, उसे अब अपनायें कैसे
लिखा है ख़त खून से उसे जलायें कैसे
मन में तस्वीर तेरी, संगदिल तुझे दिखायें कैसे
अधुरा जीवन तुम बिन, तुझपे जीवन लुटायें कैसे
बिन तेरे यूँ तन्हा जीवन बितायें कैसे,
हे ईश्वर क्या करूँ ? तू ही बता उसे पायें कैसे

मुकेश गिरि गोस्वामी हृदयगाथा : मन की बातें

3 comments:

  1. बहुत खूब ,,बहुत खब..
    कोमल भाव लिए भावपूर्ण अभिव्यक्ति...
    अति सुन्दर मनभावन प्रस्तुति....
    :-)

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