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Thursday, November 21, 2013

आज कि कुछ पंक्तियाँ ...


ख्वाबों को दफना कर , हकीकत को अपना लिया
हमने तुझे भूल कर , सपनो को तिलांजलि दिया

रहबर राह में मिलता तो है मगर बिछुड़ने के लिए
अपने - सपने तो होते हैं मगर बिखरने के लिए

यक़ीनन तुमने धोखा दिया है  इश्क़ में बा-अदब
मेरी वफ़ा के बदले दे दिया तुमने ऐसा सबब 


मुकेश गिरि गोस्वामी : हृदयगाथा : मन कि बातें 

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