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Tuesday, September 9, 2014

आँचल की पनाह

ममता माँ से ही मिलती है, नारी - काया को माँ कह के तो देख,
जानवर इंसान बन जाता है कभी ममतामयी चादर उढ़ाकर तो देख
काफिर भी बन जाते हैं राष्ट्र प्रेमी, ये काफिर कभी भारत को माँ कह के तो देख
तुझको भी मिलेगा दुलार तू कभी आँचल की पनाह लेकर तो देख
मुकेश गिरि गोस्वामी : हृदयगाथा मन की बातें

Monday, May 5, 2014

जिंदगी संवार जायेगा

तेरी बेरुखी से
दिल टूट बिखर जायेगा...
झूठ ही सहीं कह दे
मुहब्बत है जिंदगी संवार जायेगा !
तेरी बेवफाई  से
मन डूब फ़िकर में जायेगा 
झूठ ही सहीं कह दे 
 कोई वो बेवफा नहीं बंदगी  संवार जायेगा !

अजब दिलकशी है...

अजब दिलकशी है, तेरे लिबास में
क्या अंदाज़ है, तेरे बात में
मीठी रुस्वाई है, तेरे मिलान की आस में

मन मचल रहा है, भंवर जैसे कुमुदनी में
दिल बैचैन है तेरे इन्तिज़ार में
यक़ीनन तड़फ रही है तू भी मेरे प्यार में

मुकेश गिरी गोस्वामी : हृदयगाथा मन की बातें

Wednesday, March 5, 2014

लाज़मी सा है ..



सुना था "वादे" तो तोड़ने के लिए होते हैं,
आज उसके कारण "ख़ामोशी" से रोते हैं
कैसे "यकीं" दिलाऊँ अपनी "बेबसी" का
शायद "बैचैन" तड़फ़ना ही सजा है "बेवफाई" का 
उदासी का "आलम" भी "अंजाना" सा है

"अदि " तीमारदारी तुम्हारी "लाज़मी" सा है




नई कवितायेँ ...

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