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Tuesday, September 9, 2014

आँचल की पनाह

ममता माँ से ही मिलती है, नारी - काया को माँ कह के तो देख,
जानवर इंसान बन जाता है कभी ममतामयी चादर उढ़ाकर तो देख
काफिर भी बन जाते हैं राष्ट्र प्रेमी, ये काफिर कभी भारत को माँ कह के तो देख
तुझको भी मिलेगा दुलार तू कभी आँचल की पनाह लेकर तो देख
मुकेश गिरि गोस्वामी : हृदयगाथा मन की बातें

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