Followers

Friday, February 18, 2011

कविता वृशाली के नाम....

वृष्टि होती है शबनम की जब तुम मुस्काती हो, सच कहूँ तुम दिल को भाती हो!
शायद ना हो कोई ऐसा जिसे तुम न सताती हो, फिर लाड-प्यार से क्यूँ मानती हो!
लीला तुम्हारी बचपन की देखकर सब मुस्काते थे, अब गंभीर क्यूँ बन जाती हो!
........सच कहूँ फिर भी तुम मेरे मन को बहुत भाती हो

1 comment:

नई कवितायेँ ...

LatestPoetry:


Hindi