Saturday, May 22, 2021

विपत्ति की घडी में साथ खड़े रहें

आज लिखने का मन तो बहुत कुछ हो रहा है लेकिन लिखना आसान नहीं है आज मेरे लिए क्योंकी पिछले कुछ दिनों में कोरोना ने अपने बहुत से साथी, रिश्तेदार, और पहचान के लोगों मृत्यु के गोद में चले गए... 


विश्वास ही नहीं हो रहा है जो कल तक पूरी तरह स्वस्थ थे, एका-एक  करोना वायरस के चपेट में आ गए और देखते ही देखते मृत्यु की गोद  में चले गए और हम सब हाथ में हाथ धरे देखते रह गए। 


आओ साथ मिलकर इस महामारी से लड़ें अपनों को इस विपत्ति की घडी में साथ खड़े रहें। 


तेरा शुक्रिया मैं क्यूँ अदा करूँ ... 2020 -21



तूने अपनों को तड़फ़ाया, लोगों को अपनों से जुदा करवाया

साल के हर दिन तूने पल पल मृत्यु का अहसास करवाया

कौन अपना कौन पराया जो साथ खड़ा हुआ वो अपना भाया 

तूने जब करवट बदली ऐसे अपने लोगों को बना दिया पराया 


Saturday, October 17, 2020

क्या फ़ायदा ...

 क्या फ़ायदा हुआ

मगरूर-ऐ-हुस्न का

बस जलता हुआ

धुआँ है बुझते चिराग का



तुम होने नही दोगी ...

 भूल जाये तु मुझे ऐसा तो

कभी होगा नही

तुझे मैं भूल जाऊं ऐसा तो

तुम होने नही दोगी

तमन्ना है गर मौत आये तो

तेरी बाहों में आये

वादा करो तुम वर्ना ऐसे तो

सोने नही दोगी




तेरे पास हूँ मैं ...

तेरे हर शब्द का 
अहसास हूँ मैं
तु कहे ना कहे
तेरे लिए खास हूँ मैं
तु रहे दूर कही भी
इस कयानात में
हर लम्हे हर क्षण 
तेरे पास हूँ मैं


Friday, September 4, 2020

पहली मुलाकात...

 याद है, तुमने पुछा था 

कि मैं तुम्हें जानती नहीं तो

दोस्ती कैसी हो सकती है

मेरा जवाब था,

हर दोस्त पहली मुलाकात में

अजनबी ही होता है


काली जुल्फों को यू बिखराया ना करो...

 काली जुल्फों को यू बिखराया ना करो

गर बिखर जाये तो संवारा ना करो

यूँ तन्हाई में गुज़र रहा है जीवन हमारा

कभी दिल से पुकारा तो करो

कुर्बान दिलो जान तेरी मुस्कुराहट के लिए

कभी खुल के आजमाया तो करो

खींचे चले आएंगे तेरी सांसो की कसक से

कभी धड़कनो को बढ़ाया तो करो

तेरे आंखों की काजल से घटा छा गई है

कभी  बारिश भी कराया करो

रंजो गम तो जिंदगी का फ़लसफ़ा है

यूँ दिल की आरजू को दबाया ना करो




तेरा साथ...

दुःख में ख़ुशी की

वजह बनता है

तेरा साथ

दर्द में राहत की

वजह बनता है

तेरा साथ

जब कुछ भी 

अच्छा नहीं लगता

दुनिया में

तब जीने की

वजह बनता है

तेरा साथ



मौशिक़ी पसंद आये...

 लौटोगे नही अब हमारी उन पुरानी यादो में

लौट के देख लो शायद आशिक़ी पसंद आये

पुकार लो ना अब हमारे उन पुराने नामों में

सुन के देख लो शायद मौशिक़ी पसंद आये




साहिल पे...

 साहिल पे खड़े होकर

सागर को लल्कारा ना करो

ऐसे प्यार से ऐतबार से

हमको पुकारा ना करो

बिखरे हैं जुल्फ़े तेरी

इसे अब संवारा ना करो