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Saturday, December 17, 2016

नोटबंदी... नाकाबंदी


महंगाई से जन जन तंग हो गये हैं...
जीने की तमन्ना भी अब भंग हो गये हैं...

चारा और पानी के लिए भी जंग हो गए हैं...
बढ़ी मुसीबत ऐसी दुश्मन भी संग हो गए हैं...


मुकेश गिरि गोस्वामी : ह्रदय गाथा मन की बातें

कोई अंदाज़ तो दे ...




पुरानी यादों से कोई आवाज़ तो दे, 
बीते लम्हों के कोई साज़ तो दे...
दौड़े चले आयेंगे तू पुकार तो दे, 
मिट जायेंगे मुस्कुराहट पे तू कोई अंदाज़ तो दे...
 
मुकेश गिरि गोस्वामी : ह्रदय गाथा मन की बातें

दर्द छलकता रहा....


दर्द छलकता रहा शब्दों मे... 
अंखियन से नीर बह गयी...
मेरा पीडा रहा लफजों मे...
शखियन की कविता सब कह गयी...



मुकेश गिरि गोस्वामी : ह्रदय गाथा मन की बातें

तुम भी आईना निकली...




                                                             तुम भी आईना निकली...
                                                       जो भी सामने आया उसकी हो गयी...
 
मेरी शराफत ये मुहब्बत तडफी...
तुम गुमनाम गालियों मे खो गयी... 

मुकेश गिरि गोस्वामी : ह्रदय गाथा मन की बातें

Tuesday, September 9, 2014

आँचल की पनाह

ममता माँ से ही मिलती है, नारी - काया को माँ कह के तो देख,
जानवर इंसान बन जाता है कभी ममतामयी चादर उढ़ाकर तो देख
काफिर भी बन जाते हैं राष्ट्र प्रेमी, ये काफिर कभी भारत को माँ कह के तो देख
तुझको भी मिलेगा दुलार तू कभी आँचल की पनाह लेकर तो देख
मुकेश गिरि गोस्वामी : हृदयगाथा मन की बातें

Monday, May 5, 2014

जिंदगी संवार जायेगा

तेरी बेरुखी से
दिल टूट बिखर जायेगा...
झूठ ही सहीं कह दे
मुहब्बत है जिंदगी संवार जायेगा !
तेरी बेवफाई  से
मन डूब फ़िकर में जायेगा 
झूठ ही सहीं कह दे 
 कोई वो बेवफा नहीं बंदगी  संवार जायेगा !

अजब दिलकशी है...

अजब दिलकशी है, तेरे लिबास में
क्या अंदाज़ है, तेरे बात में
मीठी रुस्वाई है, तेरे मिलान की आस में

मन मचल रहा है, भंवर जैसे कुमुदनी में
दिल बैचैन है तेरे इन्तिज़ार में
यक़ीनन तड़फ रही है तू भी मेरे प्यार में

मुकेश गिरी गोस्वामी : हृदयगाथा मन की बातें

Wednesday, March 5, 2014

लाज़मी सा है ..



सुना था "वादे" तो तोड़ने के लिए होते हैं,
आज उसके कारण "ख़ामोशी" से रोते हैं
कैसे "यकीं" दिलाऊँ अपनी "बेबसी" का
शायद "बैचैन" तड़फ़ना ही सजा है "बेवफाई" का 
उदासी का "आलम" भी "अंजाना" सा है

"अदि " तीमारदारी तुम्हारी "लाज़मी" सा है




Thursday, November 21, 2013

आज कि कुछ पंक्तियाँ ...


ख्वाबों को दफना कर , हकीकत को अपना लिया
हमने तुझे भूल कर , सपनो को तिलांजलि दिया

रहबर राह में मिलता तो है मगर बिछुड़ने के लिए
अपने - सपने तो होते हैं मगर बिखरने के लिए

यक़ीनन तुमने धोखा दिया है  इश्क़ में बा-अदब
मेरी वफ़ा के बदले दे दिया तुमने ऐसा सबब 


मुकेश गिरि गोस्वामी : हृदयगाथा : मन कि बातें 

Sunday, September 15, 2013

तेरे दर पे ही तो ...


फलसफा-ये -इश्क में तबाही का मंजर देखा है,
दहकते अंगारों से मैंने ज़ख्मों को सका है 
वफ़ा की हसरत थी फिर भी दिल को टूटते देखा है
कैसे यकीं करूँ खुदायी पे तेरे ये खुदा 
तेरे दर पे ही तो सब लुटाते हुए देखा है

मुकेश गिरि गोस्वामी : हृदयगाथा मन की बातें

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