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Wednesday, September 26, 2012

लिखकर नाम मेरा मिटाकर तो देखिये ...




अपनी नज़रों से मेरी नज़रें मिलाकर तो देखिये 
कभी दिल ही दिल गुनगुनाकर तो देखिये  
मंजिल मिल जाएगी 
कभी कदम से कदम मिलाकर तो देखिये
हम तो बसे हैं सिर्फ तेरी सांसों में
दिल से कभी तलाश कर के तो देखिये 
हम बिक जायेंगे तेरी इक मुस्कराहट पे
 कभी आजमा कर तो देखिये 
दुनिया में न मिलेगा कोई हम सा आशिक,
कभी दिल से दिल मिलाकर तो देखिये
हमारी यादें कभी मिट न सकेंगी दिल से तुम्हारी
कोशिश लिखकर नाम मेरा मिटाकर तो देखिये  

"मुकेश गिरि गोस्वामी हृदयगाथा : मन की बातें"

2 comments:

  1. बहुत ही प्यारी बहुत ही सुन्दर रचना...
    मनभावन..
    :-)

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