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Sunday, September 15, 2013

तेरे दर पे ही तो ...


फलसफा-ये -इश्क में तबाही का मंजर देखा है,
दहकते अंगारों से मैंने ज़ख्मों को सका है 
वफ़ा की हसरत थी फिर भी दिल को टूटते देखा है
कैसे यकीं करूँ खुदायी पे तेरे ये खुदा 
तेरे दर पे ही तो सब लुटाते हुए देखा है

मुकेश गिरि गोस्वामी : हृदयगाथा मन की बातें

देखा एक ख्वाब...


क्या लिखूं तू बेवफा जो हो गयी है
झूट के बाज़ार कहाँ  खो गयी है
उम्मीद न थी की तू बेरहम होगी 
सोचा  था साथ  जन्मो तक दोगी 
मगर ख्वाब हकीकत से तोड़ दिया 
मेरी मुहब्बत  को धोका दे छोड़ दिया 
मौत से तो लड़ जीत आया मैं 
 फिर क्यूँ खुद से तुझको दूर पाया मैं
मुकेश गिरि गोस्वामी : हृदयागाथा -मन की बातें

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