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Saturday 17 December 2016

तुम भी आईना निकली...




                                                             तुम भी आईना निकली...
                                                       जो भी सामने आया उसकी हो गयी...
 
मेरी शराफत ये मुहब्बत तडफी...
तुम गुमनाम गालियों मे खो गयी... 

मुकेश गिरि गोस्वामी : ह्रदय गाथा मन की बातें

1 comment:

  1. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल सोमवार (19-12-2016) को "तुम्हारी याद स्थगित है इन दिनों" (चर्चा अंक-2561) पर भी होगी।
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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