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Tuesday, November 29, 2011

पैर बंधे जंजीरों में ...

दूर खड़ा एक परदेशी,
देश की यादों में खोया !
पैसों की ललक में बन परदेशी,
खुली - खुली आँखों से सोया !
शौहरत की खुशियाँ पल भर की,
याद में अपनो की रात - रात रोया !
वतन लौटने की कशमकश है वो,
पर पैर बंधे जंजीरों में पाया !
यही कसक है परदेशियों की,
यहाँ गरीबी में भी खुशियाँ है छाया !

मुकेश गोस्वामी हृदयगाथा : मन की बातें

Saturday, November 26, 2011

इस "रिश्ते" को क्या नाम दूँ ...


"ख्याल" जो आये
ह्रदय में
"तरंगें" लहरा जाती है
यादें तेरी
"मन" की हलचल
ठहरा जाती है,
बातें सुनकर
"आत्मा"
"तृप्त" क्यूँ हो जाती है ?
क्या ? इश्क-ए-जूनून
ऐसे ही होता है ?
मन में
"असमंजस" होता है
डर क्यूँ लगता है
प्रेम की "परिभाषा"
में उलझ जाती हूँ
इस "रिश्ते" को
क्या नाम दूँ
समझ नही पाती हूँ

मुकेश गोस्वामी "हृदयगाथा"

Monday, November 21, 2011

ख्वाहिश है...


खुशियाँ घेर रखी है, जीवन को
देख तुम्हे मुस्काने की ख्वाहिश है

सजाओ मांग मेरी, फरमाइश है
दुल्हन बनू मैं तेरी, ख्वाहिश है

कठिन रास्ते हो, परवाह नहीं है
हमराह बनू, संग-संग चलूँ ख्वाहिश है

तुम्हारी जुदाई कैसे सह सकुंगी,
दासी बनू चरणों की ख्वाहिश है


Friday, November 11, 2011

प्यार का साथ बांकी है


बीता महज पॉँच - दस साल ही है,
यादें तो कल की लगती है !
निगाहों में ताकत रहती थी देखने की,
तो तुम्हे छुप छुपकर ताकना !
तेरे घर के राहे-चौराहे बैठ,
मूंगफल्ली और चने दिन भर फांकना !
सुबह ताजी हवा लेने तुम जाती हो,
ये जानकर तेरे मुहल्ले पहुँचकर हांफना !
किताबे तेरी चुराकर,
फूल गुलाबों के टांकना !
क्या ये मुहब्बत नहीं लगती थी,
तेरे बालकनी से तुम्हे झांकना !
समय बीत गया अहसास बांकी है,
अब तलक तेरे प्यार का साथ बांकी है !

Thursday, November 10, 2011

मुस्कुराहट की तलाश में...


कैसी होगी तुम अब,
ये सोच के दिल घबरा जाता है
तू आएगी कब,
इन्तिज़ार में आंखे पथरा जाता है
बिछुड़कर तुम्हें फर्क पड़ा नही,
ऑंखें मेरा नम हो जाता है
मुस्कुराहट की तलाश में,
मेरा दिल संभल जाता है
सांसें रुकती नहीं,
पर धडकन थम सा जाता है


Wednesday, November 2, 2011

चंद लम्हे ...


नज़रें ढुढती है तुम्हे,
नज़रों से नजराना दे दो !

कोई कहानी नहीं जिंदगी में,
जुबान से अफसाना दे दो !

सुकून की तलाश में भटक रहा हूँ,
दिल का ऐतबार दे दो,

पतझड़ सा जीवन है,
जिंदगी की बहार दे दो !

चंद लम्हे की जिंदगी है,
झूट ही सहीं एक बार कह दो !

Tuesday, November 1, 2011

माँ की दुआ...


माँ तो सिर्फ माँ होती है,
माँ की दुआ तो जन्नत से है अनमोल !

रूठकर जाते हो माँ से ऐसे क्यूँ,
आना होगा माँ के क़दमों में दुनिया है गोल !

माँ मिलती नहीं बाज़ारों में,
उसकी ममता को पैसों से न तोल-मोल !

माँ की दुआ तो होती ही है "दुआ",
बददुआ में भी बेटे के लिए दुआ ही होती है,

ये तू क्या समझेगा मुर्ख,
माँ तुझसे बिछुड़ के कितना रोती है !

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