
"ख्याल" जो आये
ह्रदय में
"तरंगें" लहरा जाती है
यादें तेरी
"मन" की हलचल
ठहरा जाती है,
बातें सुनकर
"आत्मा"
"तृप्त" क्यूँ हो जाती है ?
क्या ? इश्क-ए-जूनून
ऐसे ही होता है ?
मन में
"असमंजस" होता है
डर क्यूँ लगता है
प्रेम की "परिभाषा"
में उलझ जाती हूँ
इस "रिश्ते" को
क्या नाम दूँ
समझ नही पाती हूँ
मुकेश गोस्वामी "हृदयगाथा"
ह्रदय में
"तरंगें" लहरा जाती है
यादें तेरी
"मन" की हलचल
ठहरा जाती है,
बातें सुनकर
"आत्मा"
"तृप्त" क्यूँ हो जाती है ?
क्या ? इश्क-ए-जूनून
ऐसे ही होता है ?
मन में
"असमंजस" होता है
डर क्यूँ लगता है
प्रेम की "परिभाषा"
में उलझ जाती हूँ
इस "रिश्ते" को
क्या नाम दूँ
समझ नही पाती हूँ
मुकेश गोस्वामी "हृदयगाथा"
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nishbd