
बीता महज पॉँच - दस साल ही है,
यादें तो कल की लगती है !
निगाहों में ताकत न रहती थी देखने की,
तो तुम्हे छुप छुपकर ताकना !
तेरे घर के राहे-चौराहे बैठ,
मूंगफल्ली और चने दिन भर फांकना !
सुबह ताजी हवा लेने तुम जाती हो,
ये जानकर तेरे मुहल्ले पहुँचकर हांफना !
किताबे तेरी चुराकर,
फूल गुलाबों के टांकना !
क्या ये मुहब्बत नहीं लगती थी,
तेरे बालकनी से तुम्हे झांकना !
समय बीत गया अहसास बांकी है,
अब तलक तेरे प्यार का साथ बांकी है !
यादें तो कल की लगती है !
निगाहों में ताकत न रहती थी देखने की,
तो तुम्हे छुप छुपकर ताकना !
तेरे घर के राहे-चौराहे बैठ,
मूंगफल्ली और चने दिन भर फांकना !
सुबह ताजी हवा लेने तुम जाती हो,
ये जानकर तेरे मुहल्ले पहुँचकर हांफना !
किताबे तेरी चुराकर,
फूल गुलाबों के टांकना !
क्या ये मुहब्बत नहीं लगती थी,
तेरे बालकनी से तुम्हे झांकना !
समय बीत गया अहसास बांकी है,
अब तलक तेरे प्यार का साथ बांकी है !
very good
ReplyDeleteBAHOT HI PAYARA EHSAAS
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