जब लिखने बैठता हूँ, तस्वीर तेरी आँखों में छा जाती है!
किताबों में दफ़न फूलों से अब तलक तेरी खुशबु आती है!!
Friday, October 28, 2011
अजीब बंदिशें....
तेरीतारीफमैंकरूँकैसे, अजीब बंदिशें लगा रखी है ! जिंदगी की तलाश किन राहों में करूँ, मौत की बिसात फैला रखी है ! दम घुट जायेगा क्या इस तरहा, जहरीली हवा जो बहा रही है ! तेरी आँखों की के इशारों को समझूँ . या लडखडाते लबों को जो दास्ताँ कह रही है !
bahot khub humesha ki tarah .
ReplyDeleteaapke comment hamesha utprerak hain mere liye
ReplyDeletevery nice............
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