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नई कवितायेँ ...

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Hindi

Saturday 17 December 2016

नोटबंदी... नाकाबंदी


महंगाई से जन जन तंग हो गये हैं...
जीने की तमन्ना भी अब भंग हो गये हैं...

चारा और पानी के लिए भी जंग हो गए हैं...
बढ़ी मुसीबत ऐसी दुश्मन भी संग हो गए हैं...


मुकेश गिरि गोस्वामी : ह्रदय गाथा मन की बातें

कोई अंदाज़ तो दे ...




पुरानी यादों से कोई आवाज़ तो दे, 
बीते लम्हों के कोई साज़ तो दे...
दौड़े चले आयेंगे तू पुकार तो दे, 
मिट जायेंगे मुस्कुराहट पे तू कोई अंदाज़ तो दे...
 
मुकेश गिरि गोस्वामी : ह्रदय गाथा मन की बातें

दर्द छलकता रहा....


दर्द छलकता रहा शब्दों मे... 
अंखियन से नीर बह गयी...
मेरा पीडा रहा लफजों मे...
शखियन की कविता सब कह गयी...



मुकेश गिरि गोस्वामी : ह्रदय गाथा मन की बातें

तुम भी आईना निकली...




                                                             तुम भी आईना निकली...
                                                       जो भी सामने आया उसकी हो गयी...
 
मेरी शराफत ये मुहब्बत तडफी...
तुम गुमनाम गालियों मे खो गयी... 

मुकेश गिरि गोस्वामी : ह्रदय गाथा मन की बातें

Tuesday 9 September 2014

आँचल की पनाह

ममता माँ से ही मिलती है, नारी - काया को माँ कह के तो देख,
जानवर इंसान बन जाता है कभी ममतामयी चादर उढ़ाकर तो देख
काफिर भी बन जाते हैं राष्ट्र प्रेमी, ये काफिर कभी भारत को माँ कह के तो देख
तुझको भी मिलेगा दुलार तू कभी आँचल की पनाह लेकर तो देख
मुकेश गिरि गोस्वामी : हृदयगाथा मन की बातें