जब लिखने बैठता हूँ, तस्वीर तेरी आँखों में छा जाती है! किताबों में दफ़न फूलों से अब तलक तेरी खुशबु आती है!!
Monday, December 31, 2018
Saturday, December 17, 2016
Tuesday, September 9, 2014
आँचल की पनाह
ममता माँ से ही मिलती है, नारी - काया को माँ कह के तो देख,
जानवर इंसान बन जाता है कभी ममतामयी चादर उढ़ाकर तो देख
काफिर भी बन जाते हैं राष्ट्र प्रेमी, ये काफिर कभी भारत को माँ कह के तो देख
तुझको भी मिलेगा दुलार तू कभी आँचल की पनाह लेकर तो देख
मुकेश गिरि गोस्वामी : हृदयगाथा मन की बातें
जानवर इंसान बन जाता है कभी ममतामयी चादर उढ़ाकर तो देख
काफिर भी बन जाते हैं राष्ट्र प्रेमी, ये काफिर कभी भारत को माँ कह के तो देख
तुझको भी मिलेगा दुलार तू कभी आँचल की पनाह लेकर तो देख
मुकेश गिरि गोस्वामी : हृदयगाथा मन की बातें
Monday, May 5, 2014
Wednesday, March 5, 2014
Thursday, November 21, 2013
आज कि कुछ पंक्तियाँ ...
ख्वाबों को दफना कर , हकीकत को अपना लिया
हमने तुझे भूल कर , सपनो को तिलांजलि दिया
रहबर राह में मिलता तो है मगर बिछुड़ने के लिए
अपने - सपने तो होते हैं मगर बिखरने के लिए
यक़ीनन तुमने धोखा दिया है इश्क़ में बा-अदब
मेरी वफ़ा के बदले दे दिया तुमने ऐसा सबब
मुकेश गिरि गोस्वामी : हृदयगाथा : मन कि बातें
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