Tuesday, March 26, 2019

अभी भी कुछ नही बिगड़ा है ...


तुम्हे मुहब्बत सी हो गई है, सोच लो
अभी भी कुछ नही बिगड़ा है ...

तुम मेरी यादों में खो गयी हो, जाग जाओ 
अभी भी कुछ नही बिगड़ा है ...

जान लुटाने को बेताब हो क्यूँ,  जान लो
अभी भी कुछ नही बिगड़ा है ...

दुश्मन बना लिया ज़माने को तुमने, सोच लो
अभी भी कुछ नही बिगड़ा है ...

वो भी क्या दिन थे...


वो भी क्या दिन थे ना 
जब दोस्तों के साथ फ़िरा करते थे
वो भी क्या दिन थे ना 
जब 1 रूपया में 2 समोसे खाया करते थे
वो भी क्या दिन थे ना
जब तेरी एक झलक पाने के लिए घंटों खड़ा रहा करते थे
वो भी क्या दिन थे ना 
जब तुम्हारे घर के पचिसो चक्कर लगाया करते थे
वो भी क्या दिन थे ना
जब जम कर हम होली खेला करते थे
वो भी क्या दिन थे न
जब ईद में घर जा जा कर मिला करते थे
वो भी क्या दिन थे न
जब तुम और हम सिर्फ़ हम हुआ करते थे

कमरे को शिकायत...

कि मैं उसको समय कम देता हूँ
मेरे कमरे को शिकायत रहती है
कि मैं किसी की यादों में खो जाता हूँ
मेरे कमरे को शिकायत रहती है
कि अब मैं उसको संवारता नही हूँ

एक कदम की दूरी पर...


एक कदम की दूरी पर है, तुम्हारा प्यारा सा घर
एक कदम की दूरी पर है , ठहरा है तेरा बेइंतिहा प्यार
एक कदम की दूरी पर है, तड़फता है तुम्हारा इंतिज़ार
एक कदम की दूरी पर है, अपना जग और संसार
एक कदम की दूरी पर है, खड़ी है मौत मेरे यार

तुमसे मिलकर....



तुमसे मिलकर वो पल
मेरे अनमोल हो गए
तुमसे मिलकर वो दिन
मेरे लिए खास हो गए
तुमसे मिलकर वो साथ
मेरे खूबसूरत अहसास हो गए
तुमसे मिलकर वो जुदाई
मेरी जिंदगी के संताप हो गए

Monday, March 25, 2019

जिंदगी नाराज़ ना हो...

जिंदगी नाराज़ ना हो सामने तो आओ
दिल लगाया था मैने और सज़ा तुम पाओ  

जिंदगी नाराज़ ना हो सामने आओ
वफ़ा तो मैने कि थी और दगा तुम पाओ

जिंदगी नाराज़ ना हो सामने आओ
दर्द तो मैने सहा है और मजे तुम पाओ

जिंदगी नाराज़ ना हो सामने आओ
जिंदगी नाराज़ ना हो सामने आओ 

Monday, March 11, 2019

अब के बरस ...


"जुदाई" अनंत झेल चूका हूँ, "मिलन" होगा

अब के बरस ...

"खो" गई हो लौट के "आना" होगा तुमको

अब के बरस ...

"बुझी" सी जिंदगी में दीपक "जलाना" होगा

अब के बरस ...

"सुख" गयी भूमि है, "भीगाना" है जमकर

अब के बरस ...

"बंजर" ह्रदय में फुल "खिलाना" है

अब के बरस ...

"दुखी" है मन मेरा, "खुशियाँ" दोगी तुम

अब के बरस ...

सुनी है "मांग" तेरी उसे "सजाऊंगा" मैं

अब के बरस ...

क्यों "दूर" हो तुम,  "दूर"  रह पाउँगा

अब के बरस ...

विरह की घड़ियाँ ...


अब तेरे विरह की घड़ियाँ
नासूर हुए जा रहा है
बीता वक़्त लौट कर नहीं
आएगा दिल गा रहा है

फलक तक खुशियाँ जुटाऊँ मैं तेरे लिए



क्यूँ गुमसुम गुमसुम सी सूरत तेरी है

मरहब्बा खूबसूरती की ऐसी मूरत तू है


क्यूँ चेहरे की मासूमियत गमगीन सी है

तेरे उदासी का सबब संगीन जैसी सी है


फरियाद है खुदा सेतू है मेरे लिए

फलक तक खुशियाँ जुटाऊँ मैं तेरे लिए  


Monday, December 31, 2018

अब मिटेगा जग से अँधियारा


पल पल घटित समय ये क्षण
अब संगठित होंगे ये कण

 नव वर्ष का सूर्य उदय हुआ
अब मिटेगा जग से अँधियारा

 नव उमंगें लहरा रही नव चेतना उदय हुआ  
अब जग पुल्कित हुआ बहेगी विकास  की धारा


अंग्रेजी नववर्ष के उपलक्ष्य में शुभकामनाएं 
ईश्वर आपकी सभी मनोकामना पूर्ण करे ।

मुकेश गिरि गोस्वामीहृदयगाथा : मन की बातें ”